गीदड़ों और सियारों की हुआँ हुआँ
और कुत्तों की रुदन के बीच
मुँह चिढ़ाते लाल दस्तरख्वान पर
सफ़ेद कबूतरी आत्माएँ
परों से अपनी विष्ठा को दबाये
शांति का संदेश सुनाएंगी
और हम नाक पर रुमाल धरे
तालियों की गड़गड़ाहट में
अपने पुंसत्व को परवान चढ़ाएंगे।
समाजवादी, राष्ट्रवादी, वामपंथी
रंगबिरंगी चित्तियों से सजे
जोशीले नारों से टँके सलमा सितारों वाली
खूब बड़ी से लहालोट चद्दर से
ढक दिया जायेगा 'शातिर' जनता को,
मुर्दा श्वास सी चलती
प्रतिरोधी आवाजें,
शांति-सन्देश में
तालियों की गड़गड़ाहट में
औ' लहालोट चद्दर में
जिबह किए जाते मेमने सी
गोगियाते हुए दम तोड़ेंगी।
और मैं,
कहीं बंद सीलन भरे अँधेरे में
लिख रहा होऊंगा क्रांति के गीत
कलम की सूखती रोशनाई से।।
-आशुतोष राय
और कुत्तों की रुदन के बीच
मुँह चिढ़ाते लाल दस्तरख्वान पर
सफ़ेद कबूतरी आत्माएँ
परों से अपनी विष्ठा को दबाये
शांति का संदेश सुनाएंगी
और हम नाक पर रुमाल धरे
तालियों की गड़गड़ाहट में
अपने पुंसत्व को परवान चढ़ाएंगे।
समाजवादी, राष्ट्रवादी, वामपंथी
रंगबिरंगी चित्तियों से सजे
जोशीले नारों से टँके सलमा सितारों वाली
खूब बड़ी से लहालोट चद्दर से
ढक दिया जायेगा 'शातिर' जनता को,
मुर्दा श्वास सी चलती
प्रतिरोधी आवाजें,
शांति-सन्देश में
तालियों की गड़गड़ाहट में
औ' लहालोट चद्दर में
जिबह किए जाते मेमने सी
गोगियाते हुए दम तोड़ेंगी।
और मैं,
कहीं बंद सीलन भरे अँधेरे में
लिख रहा होऊंगा क्रांति के गीत
कलम की सूखती रोशनाई से।।
-आशुतोष राय
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