मैं चाहता हूँ तुम उगो
मेरे दिल में
जैसे मिट्टी में अंखुआता बिरवा।
मैं चाहता हूँ तुम फैलो
मेरे अस्तित्व पर
जैसे भँवरे
ताल के सीने पर।
मैं चाहता हूँ
तुम गूँजो
वेद ऋचाओं सी
मेरे कानों में ;
क्योंकि तुम्हारा
उगना, फैलना, गूँजना
जरूरी है मेरे लिए
क्योंकि
तुम
मेरा अस्तित्व हो।
डॉ. आशुतोष राय
मेरे दिल में
जैसे मिट्टी में अंखुआता बिरवा।
मैं चाहता हूँ तुम फैलो
मेरे अस्तित्व पर
जैसे भँवरे
ताल के सीने पर।
मैं चाहता हूँ
तुम गूँजो
वेद ऋचाओं सी
मेरे कानों में ;
क्योंकि तुम्हारा
उगना, फैलना, गूँजना
जरूरी है मेरे लिए
क्योंकि
तुम
मेरा अस्तित्व हो।
डॉ. आशुतोष राय
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