माँ के लिए-
माँ, सुनता हूँ तुम सुंदर थी।
पर देखी नही तुम्हारी सुंदरता
सिवाय
हथेलियों पर उभर आई
बर्तन के खुरदरेपन के
या
धुँधुवाते चौके से मुँदी तुम्हारी आँखों के।
माँ, तुम गाती भी हो?
कभी सुना नही तुम्हारा गाना
सिवाय लोरी के
जो मुझे सुलाने के लिए गाती थी।
माँ, तुम सोती भी हो?
कभी देखा नही,
जब भी आँख खुली
तुम्हे जगा पाया।
माँ, तुमने अपने लिए कभी जिया?
या मुझे ही सौंप दिया खुद को?
माँ, 'मैं कृतज्ञ हूँ तुम्हारा' कहना अलम् होगा
या अपमान होगा तुम्हारा?
साँसों का हिसाब नही रखा जाता
न तो कृतज्ञ हुआ जाता है।
माँ,
तुम मेरी साँस हो।
-डॉ. आशुतोष राय
माँ, सुनता हूँ तुम सुंदर थी।
पर देखी नही तुम्हारी सुंदरता
सिवाय
हथेलियों पर उभर आई
बर्तन के खुरदरेपन के
या
धुँधुवाते चौके से मुँदी तुम्हारी आँखों के।
माँ, तुम गाती भी हो?
कभी सुना नही तुम्हारा गाना
सिवाय लोरी के
जो मुझे सुलाने के लिए गाती थी।
माँ, तुम सोती भी हो?
कभी देखा नही,
जब भी आँख खुली
तुम्हे जगा पाया।
माँ, तुमने अपने लिए कभी जिया?
या मुझे ही सौंप दिया खुद को?
माँ, 'मैं कृतज्ञ हूँ तुम्हारा' कहना अलम् होगा
या अपमान होगा तुम्हारा?
साँसों का हिसाब नही रखा जाता
न तो कृतज्ञ हुआ जाता है।
माँ,
तुम मेरी साँस हो।
-डॉ. आशुतोष राय
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